दम-ख़म से जियो जिंदगी
झुझारू बन जियो जिंदगी
दूर की कोडी नहीं है जिंदगी
अथक- प्रथक से भरी है जिंदगी
सार्थक सोच का खेल है जिंदगी
जुझते रहना है तेरी चाहत के लिए
मिले न मिले खड़ा हूँ इबादत लिए
दिल और गम का रिश्ता देखा
भरा गला आँखों तक, धूंधला गई ज्योति
हर बार रुलाती है, हाँ है हमें मुहोब्बत
क्योकि जानता हूँ,ये तेरी है फितरत
स्वार्थ से क्यों हर बार सहलाऊ
मेरी ही है तो, क्यों तुजे भुलाऊ
हाँ नहीं कहूँगा तेरी है तू ही संभाल
दिया है सबकुछ, बढ़िया है हालचाल
दिनांक : १६-९-२०१३
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