"वश्य सोशियल ग्रुप में दो मीठे दो नमकीन"
१. है सोशिअल ग्रुप की धूम नगर में, सात घटक के वैश्य सब संग में
सेवा संस्था अनेक शहर में, पर हम है वैश्य अपने ही रंग में,
सब सदस्य बोले , हर कोई यहाँ मनोरंजन में लीन
क्योकि महामंत्री का कहना,
हो भोजन में, कम से कम, दो मीठे दो नमकीन
२. दिखाने वैश्य की ताकत, कि है विष्णु ने ये हिमाकत , वादा है मिलेगी सबको राहत ,
वैश्य में शामिल सब से मेरी चाहत ,क्योकि खाई है मेने ईक्कीस कि चपत,
रेखाजी बोली, बने अध्यक्ष ,मेरे वो ,लगा कर पिन,
हो भोजन में, कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
३. वरिष्ठ उपाध्यक्ष का क्या कहना, मेरे दिमाग की गर्मी को सब सहना, कोई मुज़से न अड़ना ,
मेरा माल और ले तेरा पानी जैसा देश वैसा भेष ,मालपानी घुमाऐ देश परदेश ,
सुलेखाजी बोली , मेरा सैया है बहेतरीन ,
सुलेखाजी बोली , मेरा सैया है बहेतरीन ,
हो भोजन में, कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
४. बड़े प्रोग्राम कि तैय्यारी मेरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष की बारी मेरी, रॉयल हो या सोशल सबसे है यारी मेरी,
तप तप के भोजन बनेगा, तबही तो तापडिया को याद करेगा,
शीलाजी बाली,अब उड़ेल दो प्यारे, घी के टिन पे टिन
शीलाजी बाली,अब उड़ेल दो प्यारे, घी के टिन पे टिन
हो भोजन में, कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
५. कर के सेवा मेवा खाऊ, महामंत्री बन रौब जमाऊ, समाज सेवा रोज कमाऊ
है मेरा तकिया कलाम, मेरा निवेदन ये है, फिर आप कहो जो मंजूर,
है मेरा तकिया कलाम, मेरा निवेदन ये है, फिर आप कहो जो मंजूर,
किरणजी बोले , सुनी रे मुनीश, थारी ये बीन,
हो भोजन में कम से कम, दो मीठे दो नमकीन
६. फीस बढ़ादी अबकी बार, हिसाब से है मेरा प्यार, आज नगद ते कल उधार,
सोनीजी का है ये निवेदन, पेमेंट का है ये कनेक्शन,
अल्काजी बोले , कवि सीए जयेश रोज दिखे तुम मुज़े हसीन ,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
७. मनोरंजन का में बादशाह, हे माइक से पुराना वास्ता, येही खाना ये ही मेरा नास्ता,
रनधर करे यही पुकार, है ये मेरी सरकार, फिर क्या दरकर,
पुष्पाजी बोले ,अरे मुज़े भी है गाना , एक.. दो.. तीन
सोनीजी का है ये निवेदन, पेमेंट का है ये कनेक्शन,
अल्काजी बोले , कवि सीए जयेश रोज दिखे तुम मुज़े हसीन ,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
७. मनोरंजन का में बादशाह, हे माइक से पुराना वास्ता, येही खाना ये ही मेरा नास्ता,
रनधर करे यही पुकार, है ये मेरी सरकार, फिर क्या दरकर,
पुष्पाजी बोले ,अरे मुज़े भी है गाना , एक.. दो.. तीन
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
८. सब के मजे में मेरा मजा, कोई भी काम हो में हु खड़ा, रोज प्रॉपर्टी के पेच लड़ा,
केमेंरा मेरा फोटो तेरा, हर मीटिंग में होटल पे खड़ा,
शुभाजी बोली, सुन रे राजीव तेरी साली मेरी कज़िन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
९. सेवा करना मेरी तान, नहीं चाहिए मिठाई- मनोरंजन कि खान, सुनो महरबान,
गगरानी सेवा का सानी, रचनात्मक है उसकी बानी,
सीमाजी बोले ,मेरे मिस्टर सबसे क्लीन
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१०. लीगल हो या बहस, वैश्य के लिए करता हूँ सब सहर्ष, सभी प्रोग्राम में मेरा संघर्ष,
बच्चे- बड़े, सब करते प्यार, दुर क्यों हो प्यारे, आजाओ पास,
स्मिताज़ी बोले, हेमंत तुम हो मिस्टर बीन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
११. जोधपुरी हे मेरा ड्रेस, वाइफ के साथ ही मेरा बेस, बात करू में अपनी पेस,
डायरेक्टरी है मेरी देंन, वैश्य बढ़ेगा शैन-शैन, उतावल न करो मेन,
स्वाति जी बोली, ओम और मेरा है जोरदार सीन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१२. तिलक तानु लम्बा घना, उतनी लम्बी मुस्कान बना, हर हल में खुशहाल घना,
पुरषोत्तम हे वैश्य का धाम, आप सबसे हे मेरा नाम,
मधुजी बोली ,में हु तेरी भक्त मे लीन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१३. उमर में सबसे बड़ा, आवाज़ में मुज़से कोई नि अड़ा, बोलू में खड़ा खड़ा,
मलानी को दू सजेसन घणा, नि माने वो जिद्दी घणा,
सरला जी बोली, दिखे साबू गुस्से में जीन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१४. घराना में १ १ ५० दाखिल, कहे तुमहे भी बनाता हूँ काबिल, करो मलानी सेवा मोर,
भैया जोहे उसकि हम सम्भाले डोर, मूंगड़ जी थारी नि करनी होड़,
स्मिता जी बोली,रात दिन थम सदस्य गिन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१५. मुस्कराना मेरा काम , सूटबूट पहनू ऊँचे दाम, मजे लेता हु सुबह शाम ,
कहे शरद दरक , वैश्य में स्वर्ग , बाकि सब में है नरक ,
विजया जी बोली, तेज चलेगा तो लगती हु पिन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१६. पुरे भारत को इन्वेस्ट करदु, वैश्य में श्रेष्ठ करदु , यही तम्मना ज़ाहिर करदु,
शेर बाज़ार में कि बड़ी खरीद ,मनोज ग्रुप को तुमसे है बड़ी उम्मीद,
ममता जी बोली,पहली नज़र में तुम दिल पर आसिन,
हो भोजन में कम से कम, दो मीठे दो नमकीन
१७. जय जिनेन्द्र कर करू काम, नागेश्वर हे मेरा धाम, वैश्य कि सेवा सुबह शाम,
गुटली छोडो खाओ आम, नहीं है मेरा बहुत ताम झाम, छावनी में है मेरा काम,
प्रमिलाजी बाली, महेंद्र तुम सादगी में आमीन,
हो भोजन में कम से कम, दो मीठे दो नमकीन
१८. वैश्य के हे डाक्टर इकलौते , दवा नहीं लेक्चर पिलाते, हर मीटिंग गायब हो जाते,
सदस्य सारे ढूढते रह जाते, झालानी, मलानी तुम्हारा वारंट निकलाते,
रश्मिजी बोली, डाक्टर हो या कॉलेज में डीन,
हो भोजन में कम से कम, दो मीठे दो नमकीन
रचयता : सीए जयेश सोनी इंदौर
९४२५०६२६१७
८. सब के मजे में मेरा मजा, कोई भी काम हो में हु खड़ा, रोज प्रॉपर्टी के पेच लड़ा,
केमेंरा मेरा फोटो तेरा, हर मीटिंग में होटल पे खड़ा,
शुभाजी बोली, सुन रे राजीव तेरी साली मेरी कज़िन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
९. सेवा करना मेरी तान, नहीं चाहिए मिठाई- मनोरंजन कि खान, सुनो महरबान,
गगरानी सेवा का सानी, रचनात्मक है उसकी बानी,
सीमाजी बोले ,मेरे मिस्टर सबसे क्लीन
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१०. लीगल हो या बहस, वैश्य के लिए करता हूँ सब सहर्ष, सभी प्रोग्राम में मेरा संघर्ष,
बच्चे- बड़े, सब करते प्यार, दुर क्यों हो प्यारे, आजाओ पास,
स्मिताज़ी बोले, हेमंत तुम हो मिस्टर बीन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
११. जोधपुरी हे मेरा ड्रेस, वाइफ के साथ ही मेरा बेस, बात करू में अपनी पेस,
डायरेक्टरी है मेरी देंन, वैश्य बढ़ेगा शैन-शैन, उतावल न करो मेन,
स्वाति जी बोली, ओम और मेरा है जोरदार सीन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१२. तिलक तानु लम्बा घना, उतनी लम्बी मुस्कान बना, हर हल में खुशहाल घना,
पुरषोत्तम हे वैश्य का धाम, आप सबसे हे मेरा नाम,
मधुजी बोली ,में हु तेरी भक्त मे लीन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१३. उमर में सबसे बड़ा, आवाज़ में मुज़से कोई नि अड़ा, बोलू में खड़ा खड़ा,
मलानी को दू सजेसन घणा, नि माने वो जिद्दी घणा,
सरला जी बोली, दिखे साबू गुस्से में जीन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१४. घराना में १ १ ५० दाखिल, कहे तुमहे भी बनाता हूँ काबिल, करो मलानी सेवा मोर,
भैया जोहे उसकि हम सम्भाले डोर, मूंगड़ जी थारी नि करनी होड़,
स्मिता जी बोली,रात दिन थम सदस्य गिन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
१५. मुस्कराना मेरा काम , सूटबूट पहनू ऊँचे दाम, मजे लेता हु सुबह शाम ,
कहे शरद दरक , वैश्य में स्वर्ग , बाकि सब में है नरक ,
विजया जी बोली, तेज चलेगा तो लगती हु पिन,
हो भोजन में कम से कम,दो मीठे दो नमकीन
शेर बाज़ार में कि बड़ी खरीद ,मनोज ग्रुप को तुमसे है बड़ी उम्मीद,
ममता जी बोली,पहली नज़र में तुम दिल पर आसिन,
हो भोजन में कम से कम, दो मीठे दो नमकीन
१७. जय जिनेन्द्र कर करू काम, नागेश्वर हे मेरा धाम, वैश्य कि सेवा सुबह शाम,
गुटली छोडो खाओ आम, नहीं है मेरा बहुत ताम झाम, छावनी में है मेरा काम,
प्रमिलाजी बाली, महेंद्र तुम सादगी में आमीन,
हो भोजन में कम से कम, दो मीठे दो नमकीन
१८. वैश्य के हे डाक्टर इकलौते , दवा नहीं लेक्चर पिलाते, हर मीटिंग गायब हो जाते,
सदस्य सारे ढूढते रह जाते, झालानी, मलानी तुम्हारा वारंट निकलाते,
रश्मिजी बोली, डाक्टर हो या कॉलेज में डीन,
हो भोजन में कम से कम, दो मीठे दो नमकीन
रचयता : सीए जयेश सोनी इंदौर
९४२५०६२६१७
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