स्वयं सिद्धम् , स्वयं कल्याणम्
तेरा नसीब अच्छा नही, ये तुजे किसने कहा ?
है नसीब में आडी लकीरे ये तुजे किसने कहा?
तेरा नसीब किसने लिखा है ,तुजे पता है ?
तू जिसको कोसता वो कौन है तुजे पता है?
तेरे नसीब का हर पहलु तूने लिखा है
तेरे नसीब कि हर लकीरे तूने खींची है
तेरे नसीब कि हर लकीरे तूने खींची है
तेरे अंतर को पूछ तूने क्या क्या किया
तेरे मन से प्रथकरण करले तेरे करम
तेरे मन से प्रथकरण करले तेरे करम
तेरे परिणामो के लिए तू ही है जवाबदार
तू ईश्वर नाम कि संस्था को दोष मत दे
तू ईश्वर नाम कि संस्था को दोष मत दे
तेरे आत्मविश्वाश को ठेस मत पहूँचाना
तेरे अंदर के ईश्वर को ठोकर मत मरना
तेरे अंदर के ईश्वर को ठोकर मत मरना
तेरी सहाय के लिए ईश्वर ने तुजे ही भेजा है
तू स्वयं को पहचान , तेरी मदद खुद कर
तू स्वयं को पहचान , तेरी मदद खुद कर
तेरे विश्वाश में जग है, तेरा आधार है
उठ तेरे मनको जित ले, जिनेंद्रिय हो!
उठ तेरे मनको जित ले, जिनेंद्रिय हो!
वही है.…
स्वयं सिद्धम् , स्वयं कल्याणम्
स्वयं सिद्धम् , स्वयं कल्याणम्
रचना :
सीए. जयेश सोनी
९४२५०६२६१७
३१-०१-२०१४, इंदौर
सीए. जयेश सोनी
९४२५०६२६१७
३१-०१-२०१४, इंदौर
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